
12 सितंबर 2026 |
विद्यालय में विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, रचनात्मकता, नवाचार एवं समस्या-समाधान की क्षमता विकसित करने के उद्देश्य से विद्यालय स्तरीय विज्ञान, गणित एवं सामाजिक विज्ञान प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न कक्षाओं के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग करते हुए अपने अभिनव मॉडल एवं प्रोजेक्ट प्रस्तुत किए।
प्रदर्शनी में विद्यार्थियों ने जैविक खेती, अपशिष्ट प्रबंधन, आपदा प्रबंधन, जल संरक्षण, हरित ऊर्जा, स्मार्ट तकनीक, गणितीय अवधारणाओं तथा सामाजिक सरोकारों से जुड़े विभिन्न मॉडल प्रस्तुत किए। विद्यार्थियों ने अपने मॉडल की कार्यप्रणाली, वैज्ञानिक अवधारणा एवं दैनिक जीवन में उसकी उपयोगिता के बारे में निर्णायक मंडल के समक्ष जानकारी दी।
निर्णायक मंडल द्वारा मूल्यांकन
प्रदर्शनी में प्रस्तुत मॉडलों का मूल्यांकन विषयवार गठित निर्णायक मंडल द्वारा किया गया। वरिष्ठ एवं कनिष्ठ वर्ग के विज्ञान, गणित एवं सामाजिक विज्ञान के मॉडलों का मूल्यांकन संबंधित विषय के शिक्षकों द्वारा किया गया।
मूल्यांकन के दौरान विद्यार्थियों की विषय-वस्तु की समझ, मॉडल की उपयोगिता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, रचनात्मकता, नवाचार तथा प्रस्तुतीकरण को प्रमुख आधार बनाया गया।
ब्लॉक स्तरीय प्रतियोगिता के लिए चयन
विद्यालय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों का चयन आगामी ब्लॉक स्तरीय विज्ञान प्रदर्शनी के लिए किया गया। चयनित विद्यार्थियों ने अपने-अपने मॉडल के माध्यम से विषय की बेहतर समझ एवं रचनात्मक सोच का प्रदर्शन किया।
प्रधानाचार्य श्री कमल जोशी जी ने सभी प्रतिभागी विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना करते हुए चयनित विद्यार्थियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया तथा आगामी प्रतियोगिता के लिए शुभकामनाएँ दीं।
ब्लॉक स्तरीय प्रतियोगिता के लिए चयनित छात्र/छात्रा
- अवंतिका चंद्रा कक्षा 12
- अमन नयाल कक्षा 11
- कृतिका नागरकोटी कक्षा 10
- विशाल कुमार कक्षा 10
- कात्यानी चंद्रा कक्षा 9
- ध्रुव भाकुनी कक्षा 9
- चित्रा नेगी कक्षा 8
- कनिष्का नायल कक्षा 7
प्रदर्शनी के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी पाठ्यपुस्तकीय जानकारी को प्रयोग, मॉडल निर्माण और वास्तविक जीवन की परिस्थितियों से जोड़ने का अवसर मिला। विद्यार्थियों का उत्साह, आत्मविश्वास और अपने मॉडल को समझाने का तरीका कार्यक्रम की विशेष उपलब्धि रहा।
विद्यालय का यह आयोजन विद्यार्थियों में “सीखो, प्रयोग करो और समाधान खोजो” की भावना को विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल रहा।